योग साधक संकट में कभी धैर्य नहीं खोता, कर्म की कुशलता ही योग : पीएम मोदी


शुभम श्रीवास्तव
नई दिल्ली, 21 जून 2020 (दैनिक पालिग्राफ)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि योग का साधक कभी संकट में धैर्य नहीं खोता है। योग का अर्थ ही है- समत्वम् योग उच्यते। अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है। गीता में भगवान कृष्ण ने योग की व्याख्या करते हुए कहा है- ‘योगः कर्मसु कौशलम्’। अर्थात, कर्म की कुशलता ही योग है।
पीएम मोदी ने कहा कि जब हम योग के माध्यम से समस्याओं के समाधान और दुनिया के कल्याण की बात कर रहे हैं, तो मैं योगेश्वर कृष्ण के कर्मयोग का भी आपको पुनः स्मरण करना चाहता हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां कहा गया है-
युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।
युक्त स्वप्ना-व-बोधस्य, योगो भवति दुःखहा।।
अर्थात, सही खान-पान, सही ढंग से खेल-कूद, सोने-जागने की सही आदतें, और अपने काम, अपनी कर्तव्य को सही ढंग से करना ही योग है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां निष्काम कर्म को बिना किसी स्वार्थ के, सभी का उपकार करने की भावना को भी कर्मयोग कहा गया है। कर्मयोग की ये भावना भारत के रग रग में बसी हुई है। एक सजग नागरिक के रूप में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। हम प्रयास करेंगे कि घर पर योग और परिवार के साथ योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। हम जरूर सफल और विजयी होंगे। 
इस बार कोरोना संकट के बीच रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। कोरोना वायरस के चलते इस बार लोग एक स्थान पर जमा नहीं होकर और डिजिटल प्लेटफॉर्म और घर पर ही योग दिवस मना रहे हैं। यह पहली बार है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
बता दें कि 21 जून 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 दिसंबर 2014 को प्रस्ताव के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून 2015 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया था।


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